स्पैम कॉल पर ट्राई की सख्ती, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी पहचान और कट सकेगा कनेक्शन

नई दिल्ली: दूरसंचार नियामक ट्राई ने अवांछित वाणिज्यिक संचार यानी यूसीसी पर अंकुश लगाने के लिए नियम और सख्त कर दिए हैं। इसके तहत दूरसंचार कंपनियों के लिए संदिग्ध स्पैम कॉल्स और संदेशों की पहचान करने के वास्ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग फिल्टर का उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है।
संशोधित नियमों के तहत अगर किसी स्पैमर के पांच या उससे ज्यादा नंबर दस दिन के भीतर पहचाने जाते हैं, तो उनका दूरसंचार कनेक्शन काटा जा सकता है। इसके साथ ही उसे एक साल के लिए काली सूची में डाल दिया जाएगा। नए प्रावधानों में स्वचालित कॉल्स पर पांच पैसे प्रति मिनट का शुल्क भी तय किया गया है।
नंबर या टेम्पलेट का गलत इस्तेमाल हुआ तो कार्रवाई
अगर किसी कंपनी के नंबर या संदेश टेम्पलेट का गलत इस्तेमाल पाया जाता है, तो दूरसंचार कंपनी को उसे बंद करने की कार्रवाई करनी होगी। अगर इसके पीछे कोई टेलीमार्केटर पाया जाता है, तो उसके दूसरे नंबरों पर भी कार्रवाई हो सकती है और उसे काली सूची में डाला जा सकता है। इससे एक ही व्यक्ति या संस्था के कई नंबरों से लगातार परेशान करने वाली कॉल की गुंजाइश कम हो जाएगी।
ग्राहकों को मिला अपील करने का अधिकार
अनचाही व्यावसायिक संचार से जुड़ी शिकायत के निपटारे से असंतुष्ट ग्राहक अब 15 दिनों के भीतर अपील कर सकेंगे। इसके लिए डीएनडी ऐप, दूरसंचार सेवा प्रदाता के ऐप या पोर्टल और 1909 का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह व्यवस्था उन उपभोक्ताओं के लिए राहत है, जिनकी शिकायतें पहले एक ही चरण में बंद कर दी जाती थीं।
नए नियमों की मुख्य बातें
- एआई फिल्टर अनिवार्य: दूरसंचार कंपनियों को संदिग्ध कॉल और संदेश पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग आधारित फिल्टर लगाने होंगे।
- पांच नंबर पकड़े गए तो कनेक्शन: दस दिन में पांच या उससे ज्यादा नंबर चिह्नित होने पर कनेक्शन कटेगा और एक साल की काली सूची लागू होगी।
- पहले घोषणा जरूरी: ऑटो-डायलर, रोबोकॉल और पहले से रिकॉर्ड की गई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार आवाज वाली कॉल के लिए शुरुआत में ही इसकी घोषणा करनी होगी।
- 1600 और 1601 सीरीज: कॉल प्रबंधन ऐप इन व्यावसायिक नंबर सीरीज को एक साथ स्पैम चिह्नित या ब्लॉक नहीं कर सकेंगे।
उपभोक्ता लंबे समय से अनचाही कॉल और संदेशों की शिकायत करते रहे हैं। नियामक का मानना है कि तकनीक आधारित पहचान और कड़े दंड के इस मिले-जुले तरीके से आम ग्राहक तक पहुंचने वाली अवांछित कॉल की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकेगी।
