BREAKINGBreaking headlines from Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, and beyond.
Aaj Ka Sach
Home /business

ADP रिपोर्ट का खुलासा: भारत में अनपेड ओवरटाइम की भरमार, हफ्ते में 16 घंटे बिना सैलरी काम करने को मजबूर 24% कर्मचारी

8 September 2026
ADP रिपोर्ट का खुलासा: भारत में अनपेड ओवरटाइम की भरमार, हफ्ते में 16 घंटे बिना सैलरी काम करने को मजबूर 24% कर्मचारी

नई दिल्ली :लंबे वर्किंग आवर्स, छुट्टी के दिन भी लैपटॉप पर नजरें और बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के घंटों काम करना— आज के दौर में भारतीय वर्कफोर्स की यही कड़वी हकीकत बन चुकी है। ग्लोबल रिसर्च एजेंसी एडीपी (ADP) रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट 'पीपुल एट वर्क' में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बिना सैलरी के अतिरिक्त काम (Unpaid Overtime) करने के मामले में भारतीय दुनिया में सबसे आगे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 24 फीसदी कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे या उससे अधिक समय बिना किसी अतिरिक्त पैसे के काम कर रहे हैं। यह आंकड़ा 12 फीसदी के वैश्विक औसत से ठीक दोगुना है।

वर्क फ्रॉम होम और सीनियर पदों पर सबसे ज्यादा दबाव

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कर्मचारियों पर काम का बोझ बेतहाशा बढ़ चुका है:

  • 40% कर्मचारी प्रति सप्ताह 6 से 15 घंटे बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के काम कर रहे हैं।
  • वैश्विक स्थिति: दुनिया के बाकी देशों में स्थिति इतनी गंभीर नहीं है। वैश्विक स्तर पर 62% कर्मचारी हफ्ते में महज 5 घंटे तक बिना सैलरी के अतिरिक्त काम करते हैं, जबकि केवल 12% ही 16 घंटे से अधिक समय देते हैं।
  • कौन सबसे ज्यादा प्रभावित? रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस टाइमिंग खत्म होने के बाद भी काम करते रहने या लंच ब्रेक में काम निपटाने की यह मजबूरी सबसे ज्यादा वर्क फ्रॉम होम (रिमोट वर्किंग) करने वालों, सीनियर मैनेजर्स और टॉप लेवल एग्जीक्यूटिव्स (C-Suite) में देखी जा रही है।

AI अपनाने में भारत शीर्ष पर, जापान सबसे पीछे

कार्यस्थल पर नई तकनीक अपनाने को लेकर भी रिपोर्ट में दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं:

  • भारत में AI का दबदबा: भारत के 41 फीसदी कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि वे अपने दैनिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक है।
  • जापान में सबसे कम: इसके विपरीत, तकनीक के मामले में आगे माने जाने वाले जापान के 43% कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने कभी AI का उपयोग ही नहीं किया है।
  • विशेषज्ञों की चिंता: जहां एआई कामकाज की गति बढ़ा रहा है, वहीं इसने कर्मचारियों पर '24 घंटे कनेक्टेड रहने' और हर समय तुरंत जवाब देने का अघोषित दबाव भी पैदा कर दिया है।

थककर टूट रहे कर्मचारी: जुड़ाव में 5% की रिकॉर्ड गिरावट

लंबे कामकाजी घंटों और लगातार स्क्रीन पर बने रहने का सबसे बुरा असर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कर्मचारियों का अपने काम और कंपनी के प्रति जुड़ाव (Employee Engagement) 24% से घटकर मात्र 19% रह गया है। एक साल के भीतर 5% की यह गिरावट पूरी दुनिया में सबसे तेज है।

लगातार बढ़ते दबाव के चलते कर्मचारी बर्नआउट (थकावट) का शिकार हो रहे हैं, उनका फोकस कम हो रहा है और काम के प्रति उत्साह खत्म हो रहा है।

संसद में 'राइट टू डिस्कनेक्ट' बिल पर चर्चा तेज

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ज्यादा घंटे काम करने का मतलब कतई अधिक उत्पादकता (Productivity) नहीं है। बिना पैसे अतिरिक्त काम करने से उल्टा प्रोडक्टिविटी घट रही है और कर्मचारियों में तनाव बढ़ रहा है।

हालांकि, मौजूदा आर्थिक अनिश्चितता के कारण 46% कर्मचारियों का मानना है कि नौकरी बदलना अब आसान नहीं है, जिसके चलते वे चुपचाप यह दबाव झेलने को मजबूर हैं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब संसद में 'राइट टू डिस्कनेक्ट' (Right to Disconnect) कानून पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अगर यह कानून लागू होता है, तो कर्मचारियों को ऑफिस के निर्धारित घंटों के बाद आधिकारिक फोन कॉल, मैसेज या ईमेल का जवाब न देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों के लिए यह रिपोर्ट एक सीधी चेतावनी है कि यदि उन्हें टैलेंट को रोके रखना है, तो काम के घंटों की स्पष्ट सीमा तय करनी ही होगी।