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अगस्त में देश का निर्यात 26 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर, व्यापार घाटा भी घटा

16 September 2026
अगस्त में देश का निर्यात 26 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर, व्यापार घाटा भी घटा

नई दिल्ली: देश के निर्यात ने अगस्त में तेज छलाँग लगाई है। इस दौरान वस्तुओं का निर्यात 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जबकि व्यापार घाटा घटकर 26.86 अरब डॉलर रह गया।

इसी महीने आयात 14.1 प्रतिशत बढ़कर 70.76 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले इसी अवधि में व्यापार घाटा 27.2 अरब डॉलर था, यानी निर्यात में आई तेजी ने आयात की बढ़त के बावजूद अंतर को कुछ कम कर दिया।

पाँच महीनों का हिसाब

चालू वित्त वर्ष के पहले पाँच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त तक निर्यात 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। इसी अवधि में आयात 18.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 363 अरब डॉलर रहा।

  • अगस्त में निर्यात: 43.81 अरब डॉलर, बढ़त 26.12 प्रतिशत।
  • अगस्त में आयात: 70.76 अरब डॉलर, बढ़त 14.1 प्रतिशत।
  • व्यापार घाटा: 26.86 अरब डॉलर, पिछले साल 27.2 अरब डॉलर था।
  • सोने का आयात: 57.7 प्रतिशत घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया।

किन क्षेत्रों ने बढ़ाई रफ्तार

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक बढ़त की सबसे बड़ी वजह इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन और कपड़ा क्षेत्र का प्रदर्शन रहा। इंजीनियरिंग सामान का हिस्सा कुल निर्यात में सबसे ऊपर रहता है, इसलिए उसमें आई तेजी का असर पूरे आँकड़े पर दिखता है।

सोने के आयात में आई बड़ी गिरावट ने भी व्यापार घाटे को संभालने में भूमिका निभाई। सोना उन कुछ वस्तुओं में है जिनका आयात बिल पर सीधा और तेज असर पड़ता है, इसलिए उसमें कमी आने पर कुल अंतर पर तुरंत फर्क दिखाई देता है।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में त्योहारों की माँग और नए बाजारों तक पहुँच बढ़ने से निर्यात की रफ्तार बनी रह सकती है, हालाँकि वैश्विक हालात का असर हर महीने के आँकड़े पर पड़ता है।

निर्यात के आँकड़ों का सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ता है जहाँ बड़ी संख्या में रोजगार जुड़ा है। कपड़ा और इंजीनियरिंग दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने पर काम के अवसर तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए इन दोनों की बढ़त को अलग से देखा जा रहा है।

व्यापार घाटा उस अंतर को कहते हैं जो देश के आयात और निर्यात के बीच रहता है। यह अंतर जितना कम होगा, विदेशी मुद्रा पर दबाव उतना ही घटेगा। यही वजह है कि हर महीने जारी होने वाले इन आँकड़ों में निर्यात के साथ-साथ घाटे की दिशा पर भी नजर रखी जाती है।