BREAKINGBreaking headlines from Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, and beyond.
Aaj Ka Sach
Home /business

निर्यातकों को बड़ी राहत, अब बिना दफ्तर गए ऑनलाइन निपटेंगे व्यापार से जुड़े आवेदन

16 September 2026
निर्यातकों को बड़ी राहत, अब बिना दफ्तर गए ऑनलाइन निपटेंगे व्यापार से जुड़े आवेदन

नई दिल्ली: निर्यात-आयात से जुड़े कागजी काम के लिए अब कारोबारियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विदेश व्यापार महानिदेशालय एक केंद्रीय प्रसंस्करण विभाग शुरू करने जा रहा है, जहाँ आवेदन बिना आमने-सामने मिले, बिना कागज और बिना किसी क्षेत्रीय सीमा के निपटाए जाएँगे।

इस व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि आवेदन का निपटारा इस बात से तय नहीं होगा कि कारोबारी किस शहर या किस क्षेत्रीय कार्यालय के दायरे में आता है। फाइल किसी भी उपलब्ध अधिकारी के पास जा सकेगी, जिससे किसी एक दफ्तर पर बोझ बढ़ने की वजह से होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है।

अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से काम शुरू

नए विभाग को दिल्ली के केंद्रीय लाइसेंसिंग क्षेत्र से जोड़ा गया है और इसे अक्टूबर 2026 के दूसरे पखवाड़े में औपचारिक रूप से शुरू किया जाना है। इसके लिए महानिदेशालय के 53 अधिकारी तैनात किए गए हैं।

  • संयुक्त महानिदेशक: पाँच अधिकारी
  • उप महानिदेशक: दस अधिकारी
  • सहायक महानिदेशक: सात अधिकारी
  • बाकी स्टाफ: शेष अधिकारी और कर्मचारी प्रसंस्करण तथा जाँच के काम में लगाए जाएँगे।

छोटे निर्यातकों को ज्यादा फायदा

कारोबार जगत का मानना है कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा लाभ छोटे और मझोले निर्यातकों को मिलेगा, जिनके पास बड़े कारोबारी घरानों जैसी अलग से दस्तावेज संभालने वाली टीम नहीं होती। अब तक ऐसे कारोबारियों का काफी समय और खर्च कागज जमा कराने, हस्ताक्षर लेने और दफ्तर आने-जाने में लगता था।

विभाग की योजना है कि आवेदन की स्थिति ऑनलाइन दिखती रहे, ताकि कारोबारी को यह पता रहे कि उसकी फाइल किस चरण में है। जिन मामलों में दस्तावेज अधूरे हों, उनमें भी जानकारी उसी माध्यम से माँगी जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड एक जगह बना रहे।

अब तक की व्यवस्था में एक ही तरह के आवेदन का निपटारा अलग-अलग दफ्तरों में अलग-अलग गति से होता था, जिससे कारोबारियों को यह अंदाजा नहीं रहता था कि काम कितने दिन में पूरा होगा। एक ही जगह से प्रसंस्करण होने पर प्रक्रिया में एकरूपता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

देश के कुल निर्यात में छोटी और मझोली इकाइयों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, और इनमें से बड़ी संख्या ऐसी इकाइयों की है जो महानगरों से बाहर काम करती हैं। ऐसी इकाइयों के लिए क्षेत्रीय सीमा हटना सबसे बड़ी व्यावहारिक राहत मानी जा रही है।