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मणिपुर के कांगपोकपी में खेलों का उत्सव, कबड्डी से साइकिलिंग तक मैदान में उतरे युवा

16 September 2026
मणिपुर के कांगपोकपी में खेलों का उत्सव, कबड्डी से साइकिलिंग तक मैदान में उतरे युवा

कांगपोकपी: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में इन दिनों मैदानों पर रौनक लौटी हुई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ मिलकर स्पंदन नाम से खेल आयोजनों की एक शृंखला शुरू की है, जिसमें कबड्डी, साइकिलिंग और दौड़ तीनों में स्थानीय युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

शृंखला की शुरुआत याइकांगपाओ में कबड्डी प्रतियोगिता से हुई, जिसमें आठ टीमों ने हिस्सा लिया। मुकाबले देर तक चले और दर्शकों की भीड़ मैदान के चारों तरफ जमी रही। खिताब लोअर थांगाम्बा की टीम ने जीता। विजेता टीम को दस हजार रुपये, उपविजेता को सात हजार और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को चार हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया।

साइकिल दौड़ में उतरे पूर्व सैनिक भी

मोतबुंग में हुई दस किलोमीटर की साइकिल दौड़ इस पूरी शृंखला का सबसे दिलचस्प हिस्सा रही। इसे लामतिनलाल सिंगसित ने 28 मिनट 10 सेकंड में पूरा करके जीता। इसी दौड़ में 45 साल से ऊपर के दो पूर्व सैनिक सतंगम किपगेन और कृष्ण बहादुर कार्की भी शामिल हुए, जिनके हिस्सा लेने पर रास्ते भर लोगों ने हौसला बढ़ाया।

तीसरा आयोजन माकुई में दस किलोमीटर की मैराथन के रूप में हुआ। इसमें गॉस्पेल चवांगतिंगदुईमाई ने 36 मिनट 12 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। आयोजन से जुड़े सहायक कमांडेंट विक्रम ने बताया कि प्रतियोगिताओं के लिए रास्ते और मैदान स्थानीय लोगों की मदद से ही तैयार कराए गए।

  • कबड्डी: याइकांगपाओ में आठ टीमें, खिताब लोअर थांगाम्बा के नाम।
  • साइकिलिंग: मोतबुंग में दस किलोमीटर की दौड़, विजेता का समय 28 मिनट 10 सेकंड।
  • मैराथन: माकुई में दस किलोमीटर, विजेता का समय 36 मिनट 12 सेकंड।

मैदान से बनती साझी जगह

आयोजकों के मुताबिक इस तरह की प्रतियोगिताओं का मकसद सिर्फ खिलाड़ी खोजना नहीं, बल्कि अलग-अलग गाँवों के लोगों को एक मैदान पर लाना भी है। जिन इलाकों में खेल का ढाँचा सीमित है, वहाँ ऐसी प्रतियोगिताएँ नौजवानों के लिए नियमित अभ्यास की वजह बन जाती हैं।

स्थानीय लोगों ने माँग रखी है कि यह आयोजन साल में एक बार के बजाय नियमित अंतराल पर हो और इसमें महिला वर्ग की प्रतियोगिताएँ भी जोड़ी जाएँ। आयोजकों ने आगे के चरणों में और गाँवों को शामिल करने की बात कही है।