कानपुर में एआई मंथन 2.0 का समापन: 450 से अधिक प्रतिनिधि जुटे, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हैकाथॉन विजेताओं को किया सम्मानित

कानपुर: छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित दो दिवसीय 'एआई मंथन 2.0' का रविवार को समापन हो गया। 12 और 13 सितंबर को चले इस आयोजन ने प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप और उद्योग जगत को एक मंच पर लाकर यह समझने की कोशिश की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में शिक्षा, खेती, चिकित्सा और प्रशासन की तस्वीर कैसे बदलने जा रहा है।
आयोजन से पहले 450 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की जानकारी दी गई थी। इनमें प्रदेश के सामान्य, कृषि, तकनीकी और चिकित्सा विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, विषय विशेषज्ञ, शिक्षक, उद्योग जगत से जुड़े लोग और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल रहे।
शिक्षा से लेकर खेती और प्रशासन तक, हर क्षेत्र पर हुआ मंथन
दो दिनों के सत्रों में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि एआई का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में सबसे अधिक उपयोगी साबित हो सकता है। एआई आधारित शिक्षण और मूल्यांकन, खेती में तकनीकी समाधान, स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का इस्तेमाल और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक कामकाज में इसकी भूमिका जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
आयोजन का एक बड़ा उद्देश्य अकादमिक शोध और तकनीकी नवाचार को उद्योग से जोड़ना भी रहा, ताकि विश्वविद्यालयों में हो रहा काम प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर जमीन पर उतर सके। इसके साथ ही एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग पर भी गंभीरता से विचार किया गया।
आईआईटी कानपुर के निदेशक ने सुरक्षित इस्तेमाल पर दिया जोर
कार्यक्रम में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने एआई के तेजी से बदलते स्वरूप और उसके प्रभाव पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इस तकनीक की क्षमता बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की जरूरत भी उतनी ही बढ़ती जा रही है।
राज्यपाल ने किया समापन संबोधन, हैकाथॉन विजेता हुए पुरस्कृत
समापन समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल शामिल हुईं। उन्होंने समापन संबोधन में एआई के बढ़ते प्रभाव, उसके उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने 'बीओबी हैकाथॉन' के विजेताओं को सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने प्रदेश के विभिन्न संस्थानों से आए एआई आधारित स्टार्टअप और मॉडलों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में छात्रों और युवा शोधकर्ताओं ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए, जिनमें कई ऐसे समाधान शामिल रहे जो रोजमर्रा की व्यावहारिक समस्याओं को तकनीक की मदद से हल करने पर केंद्रित थे।
आयोजकों के अनुसार इस तरह के मंच विद्यार्थियों को न सिर्फ नई तकनीक से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें उद्योग की जरूरतों को समझने और अपने विचारों को उत्पाद में बदलने का हौसला भी देते हैं।
