अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को: चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र में समाए हैं चौदह लोक, गणेशोत्सव का भी समापन

धर्म डेस्क: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी इस बार 25 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और कलाई पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। यही दिन दस दिन चलने वाले गणेशोत्सव के समापन का भी होता है, जब बप्पा की विदाई की जाती है।
अनंत सूत्र में चौदह गांठें लगाई जाती हैं। मान्यता है कि ये चौदह गांठें चौदह लोकों का प्रतीक हैं, जिनमें सात ऊपरी और सात निचले लोक शामिल माने गए हैं। परंपरा के अनुसार पुरुष इस सूत्र को दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं।
पूजा की सरल विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा स्थापित कर धूप-दीप, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद अनंत सूत्र की पूजा कर उसे धारण किया जाता है। कई परिवारों में इस दिन कथा सुनने की भी परंपरा है।
- तिथि: 25 सितंबर, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
- अनंत सूत्र: चौदह गांठें, जो चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं
- धारण: पुरुष दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं
गणपति की विदाई का दिन
गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ उत्सव अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है। इस दिन ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई शहरों में बड़े जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं।
बीते कुछ वर्षों में पर्यावरण के अनुकूल उत्सव मनाने की परंपरा भी मजबूत हुई है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं, प्राकृतिक रंग और घर पर ही बनाए गए कृत्रिम कुंड में विसर्जन का चलन बढ़ा है। कई शहरों में नगर निकाय अलग से विसर्जन कुंड बनाते हैं, ताकि नदियों और तालाबों पर दबाव न पड़े।
पूजा में चढ़ाए गए फूलों और पत्तों को कूड़े में फेंकने के बजाय खाद में बदलने की सलाह भी दी जाती है। इससे घर के पौधों को पोषण मिलता है और उत्सव के बाद निकलने वाला कचरा भी घटता है।
इस सप्ताह कई पर्व एक साथ पड़ रहे हैं। 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी और 23 सितंबर को वामन जयंती मनाई जाएगी। इसके बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ भाद्रपद के प्रमुख आयोजनों का समापन हो जाएगा।
