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रूस ने भारत से खरीदा रिकॉर्ड ईंधन: अगस्त में 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पाद आयात, 70 फीसदी हिस्सा अकेले भारत का

13 September 2026
रूस ने भारत से खरीदा रिकॉर्ड ईंधन: अगस्त में 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पाद आयात, 70 फीसदी हिस्सा अकेले भारत का

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल रूस इस बार खुद ईंधन खरीदने वालों की कतार में दिखा, और उसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना भारत। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की ताजा मासिक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में रूस ने 1,72,000 टन पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा मासिक स्तर है।

इसमें से करीब 70 फीसदी हिस्सा भारत से आया। भारत ने लगभग 1,20,000 टन पेट्रोल रूस भेजा, जिसकी कीमत करीब 7.8 करोड़ यूरो आंकी गई है।

पिछले रिकॉर्ड से सात गुना ज्यादा

आंकड़े बताते हैं कि अगस्त का यह आयात पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना और पूरे 2025 के कुल आयात से करीब तीन गुना अधिक रहा। पेट्रोल की हिस्सेदारी अगस्त के कुल पेट्रोलियम उत्पाद आयात में 74 फीसदी रही, जबकि 2023 से 2025 के बीच यह औसतन सिर्फ 6 फीसदी थी।

सारा माल वाडीनार रिफाइनरी से लदा

रिपोर्ट के अनुसार भारत से गई सभी खेप वाडीनार रिफाइनरी से लोड हुईं, जिसका नियंत्रण नायरा एनर्जी के पास है। नायरा एनर्जी में रूस की सरकारी कंपनी रोसनेफ्ट की 49.13 फीसदी हिस्सेदारी है। 2026 के पहले आठ महीनों में वाडीनार ने अपना 100 फीसदी कच्चा तेल रूस से ही लिया, जबकि 2025 में यह अनुपात 81 फीसदी था।

सीआरईए ने इस पूरे चक्र को रेखांकित करते हुए कहा कि रूस अपना ही कच्चा तेल एक ऐसी रिफाइनरी में शोधित करा रहा है जिसमें उसकी बड़ी हिस्सेदारी है, और फिर तैयार ईंधन वापस अपने देश मंगा रहा है।

क्यों पड़ी रूस को ईंधन आयात की जरूरत

इसकी बड़ी वजह उसकी अपनी रिफाइनरियों पर पड़ा असर बताई जा रही है। अगस्त में रूस का समुद्री मार्ग से पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 21 फीसदी गिरा और इससे होने वाली आय में 32 फीसदी की कमी आई। तुआप्से बंदरगाह से लगातार तीसरे महीने कोई लदान नहीं हुआ, जबकि नोवोरोसिस्क से कच्चे तेल का लदान 58 फीसदी घटा, जहां रिकॉर्ड नौ दिन तक काम ठप रहा।

भारत रहा दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

  • कुल खरीद: अगस्त में भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार रहा, कुल 4.8 अरब यूरो की खरीद के साथ। इसमें 4.1 अरब यूरो यानी 87 फीसदी हिस्सा अकेले कच्चे तेल का रहा।
  • गिरावट भी दर्ज: जुलाई के मुकाबले भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 24 फीसदी घटा। जामनगर में 15 फीसदी की कमी आई, जबकि वाडीनार में 5 फीसदी और पारादीप में 1 फीसदी की बढ़त रही।
  • चीन सबसे आगे: करीब 8.4 अरब यूरो की खरीद के साथ चीन पहले स्थान पर रहा।

रूस की कुल कमाई पर असर

अगस्त में रूस की कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात आय 8 फीसदी घटकर 60.4 करोड़ यूरो प्रतिदिन रह गई। हालांकि रूसी कच्चे तेल की औसत कीमत 23 फीसदी बढ़कर 69.90 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो जी-7 और यूरोपीय संघ की तय 44.10 डॉलर की सीमा से काफी ऊपर है।