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भारत ने रचा नया इतिहास: रूस को पछाड़ बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फॉरेक्स रिजर्व वाला देश, विदेशी मुद्रा भंडार ऑल-टाइम हाई पर

12 September 2026
भारत ने रचा नया इतिहास: रूस को पछाड़ बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फॉरेक्स रिजर्व वाला देश, विदेशी मुद्रा भंडार ऑल-टाइम हाई पर

मुंबई।
वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) 785.7 अरब डॉलर के अब तक के सर्वोच्च स्तर (ऑल-टाइम हाई) पर पहुंच गया है। इस अभूतपूर्व बढ़त के साथ ही भारत ने रूस को पछाड़ते हुए दुनिया में चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार वाला देश बनने का गौरव हासिल कर लिया है। अब इस सूची में भारत से आगे केवल चीन, जापान और स्विट्जरलैंड ही हैं।

FCNR(B) स्कीम की सफलता: रिकॉर्ड डॉलर की आवक से उछला भंडार

ब्लूमबर्ग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते के भीतर 44.9 अरब डॉलर की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इस उछाल की सबसे बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई 'विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक)' यानी FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम रही। इस योजना को वैश्विक स्तर पर इतना जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला कि लॉन्च होने के महज 11 हफ्तों के भीतर ही 73 अरब डॉलर का निवेश देश में आ गया। निर्धारित लक्ष्य समय से पहले ही हासिल हो जाने के कारण केंद्रीय बैंक ने इस योजना को तय समयसीमा (30 सितंबर) से एक महीने पहले यानी 31 अगस्त को ही बंद कर दिया था।

सोने की कीमतों में नरमी के बावजूद बना रिकॉर्ड

विदेशी मुद्रा भंडार में यह नया कीर्तिमान तब बना है, जब समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) का मूल्य 2.59 अरब डॉलर घटकर 113.81 अरब डॉलर रह गया। हालांकि, विदेशी मुद्राओं (डॉलर, यूरो आदि) की भारी आवक ने सोने के मूल्य में आई इस गिरावट को पूरी तरह बेअसर कर दिया।

भारतीय रुपये को मिलेगा अभूतपूर्व सुरक्षा कवच

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का यह स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत और लचीली बुनियाद का प्रमाण है। इस विशाल भंडार से रिजर्व बैंक को मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की स्थिरता बनाए रखने में जबरदस्त ताकत मिलेगी। वैश्विक उथल-पुथल के समय जब भी रुपये पर दबाव बनता है, आरबीआई अपने भंडार से डॉलर जारी कर रुपये को भारी गिरावट से बचा सकता है।

बाजार से 1 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी सोखेगा RBI

डॉलर की इस भारी आवक के कारण भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में अचानक लिक्विडिटी (नकदी) का बड़ा प्रवाह हो गया है। वित्तीय संतुलन और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से आरबीआई ने बाजार से अतिरिक्त नकदी को सोखने का खाका तैयार किया है:

  • 1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड: आरबीआई 17 सितंबर से 28 सितंबर के बीच तीन अलग-अलग किश्तों में 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड (G-Secs) बेचेगा।
  • VRRR नीलामी: इससे पहले भी केंद्रीय बैंक ने 'परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो' (VRRR) नीलामी के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली से 3.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त नकदी को वापस खींचकर बाजार को संतुलित किया था।