पूजा के बचे फूलों को फेंकें नहीं, खाद से लेकर प्राकृतिक रंग तक इन पांच तरीकों से करें दोबारा इस्तेमाल

नई दिल्ली: गणपति पूजा के बाद घर में फूल, पत्ते और दूर्वा बड़ी मात्रा में बच जाते हैं। इन्हें यूं ही फेंकने के बजाय कुछ आसान तरीकों से दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे घर का जैविक कचरा भी घटता है और आसपास साफ-सुथरा रहता है।
सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम है छंटाई। फूलों के साथ आए प्लास्टिक, धागा, तार, थर्माकोल और दूसरी गैर-जैविक चीजों को अलग कर लें। इसके बाद ही बचे हुए फूल-पत्तों का उपयोग किसी भी तरीके से किया जा सकता है।
पांच आसान तरीके
- घर पर खाद: फूल और पत्तों को छोटे टुकड़ों में काटकर सूखी पत्तियों और उपयुक्त रसोई के जैविक कचरे के साथ मिलाएं, बीच-बीच में पलटते रहें और नमी का संतुलन बनाए रखें। तैयार खाद गमलों में इस्तेमाल की जा सकती है।
- सजावट के लिए सुखाना: बिना खराब हुए फूलों को छाया में सुखाकर उनकी पंखुड़ियां कांच की बोतलों, सजावटी कटोरों या पूजा की सजावट में इस्तेमाल की जा सकती हैं। इन्हें सूखी प्राकृतिक सामग्री के साथ मिलाकर भी रखा जा सकता है।
- प्राकृतिक रंग: गेंदे की साफ पंखुड़ियों को पानी में उबालकर प्राकृतिक रंग तैयार किया जा सकता है। इसका उपयोग कागज या सजावटी शिल्प पर सबसे उपयुक्त रहता है।
- दोबारा पूजा में उपयोग: ताजे और साफ फूल-पत्तों को घर की पूजा में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे छोटी माला बनाना, थाली की सजावट या मंदिर की सजावट।
- सामूहिक संग्रह: बड़ी मात्रा में बची सामग्री को जैविक कचरा कंपोस्टिंग के लिए भेजा जा सकता है। कई स्थानीय निकाय और संस्थाएं पूजा के फूलों के लिए अलग संग्रह अभियान भी चलाती हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
प्राकृतिक रंग बनाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि फूलों पर किसी तरह का रासायनिक रंग या कीटनाशक न लगा हो। सुखाकर रखने वाले फूलों को पूरी तरह सूखने के बाद ही भंडारित करें, वरना उनमें फफूंद लग सकती है।
जो फूल मुरझा चुके हैं, उन्हें दोबारा पूजा में इस्तेमाल करने के बजाय खाद बनाने में लगाना बेहतर है। इससे परंपरा और ताजगी दोनों का सम्मान बना रहता है।
त्योहार के बाद उठाए गए ये छोटे-छोटे कदम घर के जैविक कचरे को कम करते हैं और आसपास की सफाई बनाए रखने में मदद करते हैं। थोड़ी सी योजना के साथ पूजा की सामग्री कचरे के ढेर तक पहुंचने के बजाय गमलों की मिट्टी और घर की सजावट का हिस्सा बन जाती है।
