उत्तराखंड: वन विभाग के आउटसोर्स कर्मियों के वेतन और समानता के मुद्दे पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 18 सितंबर तक मांगा जवाब

नैनीताल: उत्तराखंड में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के हक को लेकर दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने वन विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को 16 माह से वेतन न मिलने और उपनल कर्मियों की तरह समान वेतन-सुविधाएं न दिए जाने के मामले में राज्य सरकार से 18 सितंबर तक जवाब तलब किया है। वहीं दूसरी ओर, मांगों पर अमल न होने से नाराज प्रदेशभर के सफाई कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे 'मुख्यमंत्री आवास कूच' की चेतावनी दे दी है।
1. वन विभाग आउटसोर्स कर्मी मामला: '16 महीने से नहीं मिला वेतन, उपनल कर्मियों जैसा मिले हक'
नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने वन विभाग में आउटसोर्सिंग के जरिए तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटरों और ड्राइवरों की याचिका पर सुनवाई की। मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को नियत की गई है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें:
- वन विभाग में कार्यरत कृष्णानंद भट्ट और अन्य कर्मियों ने याचिका दायर कर अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति आउटसोर्स एजेंसी के जरिए डाटा एंट्री ऑपरेटर और चालक के पदों पर हुई थी।
- कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले 16 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने भुखमरी का संकट पैदा हो गया है।
- याचिका में कहा गया है कि सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उपनल (UPNL) के माध्यम से तैनात कर्मचारियों को 'समान कार्य के लिए समान वेतन' और अन्य भत्ते दिए जा रहे हैं, जबकि अन्य निजी एजेंसियों के जरिए तैनात कर्मचारियों को इससे वंचित रखा जा रहा है।
- कर्मचारियों ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि उन्हें उपनल कर्मियों के समान वेतन और सुविधाएं दी जाएं और उनका बकाया वेतन तत्काल जारी करने के निर्देश सरकार को दिए जाएं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से 18 सितंबर तक जवाब पेश करने को कहा है।
2. सफाई कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: 6 मांगों पर सहमति के बाद भी फैसला नहीं, सीएम आवास घेरने की तैयारी
दूसरी तरफ, अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत प्रदेश के सफाई कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे रहा है। सफाई कर्मचारी यूनियनों ने सरकार पर वादाखिलाफी और निर्णय लेने में अनावश्यक हीलाहवाली का आरोप लगाया है।
'सहमति के बावजूद नहीं हुआ शासनादेश जारी':
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि पूर्व में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ हुई वार्ता में कर्मचारियों की 7 में से 6 मांगों पर सहमति बन गई थी, जिसके बाद कर्मचारियों ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए अपना धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया था। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ।
- हाल ही में शहरी विकास सचिव के साथ 13 सफाई कर्मचारी यूनियनों की बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों ने कहा कि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से ही लिया जाना है।
- कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पुनः मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन एक सप्ताह से अधिक बीत जाने के बावजूद उन्हें समय नहीं दिया गया है।
सीएम आवास कूच का ऐलान:
यूनियन पदाधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री ने जल्द ही प्रदेशभर के सफाई कर्मियों की समस्याओं पर वार्ता कर लंबित मांगों के शासनादेश जारी नहीं किए, तो प्रदेशभर के सफाई कर्मी सड़कों पर उतरकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव (कूच) करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
