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पेनकिलर और एंटीबायोटिक दवाओं से किडनी को बड़ा खतरा! CDSCO ने जारी की एडवाइजरी; बिना पर्ची बिक्री पर सख्त चेतावनी

23 September 2026
पेनकिलर और एंटीबायोटिक दवाओं से किडनी को बड़ा खतरा! CDSCO ने जारी की एडवाइजरी; बिना पर्ची बिक्री पर सख्त चेतावनी

हाइलाइट्स:

  • भारत के दवा नियामक CDSCO ने दर्द निवारक (NSAIDs) और एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल पर चेताया।
  • लंबे समय या बार-बार उपयोग से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का बढ़ा खतरा।
  • बिना डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के शेड्यूल H और H1 की दवाएं बेचने पर रोक का कड़ाई से पालन करने के निर्देश।
  • वायरल संक्रमण में खुद से एंटीबायोटिक न लेने और पुरानी बची दवाएं दूसरों के साथ साझा न करने की सलाह।

नई दिल्ली: अगर आप भी बदन दर्द, सिरदर्द या हल्के बुखार में बिना सोचे-समझे पेनकिलर खा लेते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक शुरू कर देते हैं, तो सावधान हो जाएं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) और एंटीबायोटिक्स के बार-बार, अत्यधिक और लंबे समय तक उपयोग के खिलाफ देशभर में एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। नियामक ने चेतावनी दी है कि इन दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी इस एडवाइजरी में आम जनता, डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, थोक-खुदरा दवा विक्रेताओं, अस्पतालों और राज्यों के ड्रग कंट्रोलर विभागों से मिलकर काम करने की अपील की गई है, ताकि इन जीवनरक्षक दवाओं के तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित किया जा सके।

बिना पर्ची के पेनकिलर और एंटीबायोटिक बेचना गैर-कानूनी

ड्रग्स रेगुलेटर ने स्पष्ट किया है कि भारत में दवाओं के निर्माण और बिक्री को 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' और 'ड्रग्स रूल्स, 1945' के तहत नियंत्रित किया जाता है।

  • शेड्यूल H (अधिकांश पेनकिलर्स/NSAIDs): अधिकांश नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (जैसे आईबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक आदि) शेड्यूल H के अंतर्गत आती हैं। इन्हें किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर (RMP) के वैध पर्चे के बिना केमिस्ट द्वारा बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
  • शेड्यूल H1 (एंटीबायोटिक्स): अधिकांश एंटीबायोटिक दवाएं 'शेड्यूल H1' श्रेणी में आती हैं। इन पर स्पष्ट वैधानिक चेतावनी होती है कि इन्हें बिना डॉक्टरी निगरानी के न तो लिया जा सकता है और न ही बिना पर्चे के बेचा जा सकता है।

सीडीएससीओ ने जोर देकर कहा कि इन दवाओं का सेवन सिर्फ तब किया जाना चाहिए जब चिकित्सकीय रूप से बहुत जरूरी हो, और वह भी डॉक्टर द्वारा तय की गई खुराक और समयावधि के अनुसार।

सेल्फ-मेडिकेशन से बचें, वायरल में एंटीबायोटिक लेना खतरनाक

नियामक ने आम जनता से अपील की है कि वे खुद अपना इलाज (Self-Medication) करने की आदत छोड़ें। अक्सर लोग सामान्य सर्दी-जुकाम या साधारण वायरल बुखार में भी एंटीबायोटिक्स खाना शुरू कर देते हैं, जबकि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का कोई असर नहीं होता और यह शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

एडवाइजरी में मरीजों को विशेष निर्देश दिए गए हैं:

दवाएं साझा न करें: किसी डॉक्टर द्वारा किसी खास बीमारी के लिए लिखी गई एंटीबायोटिक को परिवार के अन्य सदस्यों या दोस्तों के साथ साझा न करें।

बची हुई दवाएं न खाएं: पिछली बीमारी की बची हुई दवाओं का दोबारा उपयोग खुद से कभी न करें।

लक्षण बने रहने पर डॉक्टर को दिखाएं: यदि दर्द या बुखार बार-बार लौट रहा हो, तो खुद से बार-बार दवाएं खाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

किडनी मरीजों के लिए विशेष चेतावनी

सीडीएससीओ ने कहा है कि जिन मरीजों को पहले से किडनी की कोई बीमारी है या जिनका रीनल फंक्शन कमजोर है, उन्हें दर्द निवारक दवाएं लेने से पहले अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी अनिवार्य रूप से देनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पेनकिलर्स का हल्का सा भी अनियंत्रित उपयोग किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।

नियामक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों से कहा है कि वे मेडिकल स्टोर्स पर शेड्यूल H और H1 के नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि ओवर-द-काउंटर (बिना पर्ची) इन दवाओं की खुली बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।