BREAKINGBreaking headlines from Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, and beyond.
Aaj Ka Sach
Home /uk/ देहरादून

जौनसार-बावर में दिखावे पर लगाम, शादी-समारोह में अब तीन पारंपरिक गहने ही पहनेंगी महिलाएं

20 September 2026
जौनसार-बावर में दिखावे पर लगाम, शादी-समारोह में अब तीन पारंपरिक गहने ही पहनेंगी महिलाएं

देहरादून: जौनसार-बावर में सामाजिक सुधार और विवाह समारोहों की फिजूलखर्ची रोकने की मुहिम लगातार जोर पकड़ रही है। खरोड़ा और कुताड़ गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार को एक अहम पंचायत कर महिलाओं के आभूषणों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया। अब शादी-विवाह, मेले-त्योहारों या दूसरे सामाजिक आयोजनों में महिलाएं केवल तीन पारंपरिक गहने ही पहन सकेंगी।

पंचायत में सर्वसम्मति से तय हुआ कि अब से महिलाएं नाक में सोने की फुल्ली, कानों में झुमके और गले में मंगलसूत्र पहनेंगी। इसके अलावा किसी भी दूसरे भारी आभूषण को पहनने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। नियम तोड़ने वाले परिवार पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी रखा गया है।

महिलाओं ने ही किया फैसले का सबसे मजबूत समर्थन

बैठक की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें मौजूद महिलाओं ने ही इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया। उनका मानना था कि इससे आयोजनों में सादगी आएगी और अमीरी-गरीबी का भेद खत्म होगा। कई महिलाओं ने कहा कि गहनों की होड़ के कारण साधारण परिवारों पर बेवजह का दबाव बन जाता था, जिससे अब राहत मिलेगी।

स्याणा की अध्यक्षता में हुई संयुक्त बैठक

ग्रामीणों की यह संयुक्त बैठक स्याणा चंद्रदत्त डिमरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विवाह समारोहों में बढ़ते आभूषणों के दिखावे और उससे परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक दबाव पर चिंता जताई गई। बैठक में साधीराम डिमरी, भगतराम, संतराम, मेहर चंद, दयाराम, ग्यारू, सुरेश, हरीश, रूपराम और नरेंद्र समेत कई ग्रामीण मुख्य रूप से मौजूद रहे।

क्या-क्या तय हुआ पंचायत में

  • तीन गहनों की सीमा: नाक की फुल्ली, झुमके और मंगलसूत्र के अलावा भारी आभूषण पहनने पर रोक रहेगी।
  • आर्थिक दंड: नियम का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
  • दायरा: यह व्यवस्था शादी-विवाह के साथ-साथ मेले, त्योहार और दूसरे सामाजिक आयोजनों पर भी लागू होगी।

जौनसार-बावर क्षेत्र अपनी अलग सामाजिक परंपराओं और सामूहिक निर्णय की व्यवस्था के लिए जाना जाता है। यहां गांवों की पंचायतें समय-समय पर सामाजिक कुरीतियों और खर्चीली परंपराओं को लेकर सामूहिक फैसले लेती रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के दूसरे गांवों में भी इसी तरह के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है और आने वाले दिनों में यह मुहिम और बड़े दायरे में पहुंच सकती है।