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मिट्टी की मुहरों ने बदली मिस्र की कहानी, पाँच हजार साल पहले एक महिला ने संभाली थी राजगद्दी

16 September 2026
मिट्टी की मुहरों ने बदली मिस्र की कहानी, पाँच हजार साल पहले एक महिला ने संभाली थी राजगद्दी

काहिरा: अस्सी साल पुरानी एक धुँधली तस्वीर और मिट्टी के 13 ढक्कनों ने प्राचीन मिस्र के इतिहास का एक अध्याय दोबारा लिखवा दिया है। नए अध्ययन के मुताबिक पाँच हजार साल पहले मेरतनीथ नाम की महिला ने मिस्र में सिर्फ संरक्षक की भूमिका नहीं निभाई थी, बल्कि उन्हें राजा के दर्जे से नवाजा गया था।

यह शोध पत्रिका प्राग इजिप्टोलॉजिकल स्टडीज में प्रकाशित हुआ है और इसका नेतृत्व शोधकर्ता सुसान केली ने किया। जिन मुहरों पर काम हुआ, वे 1940 के दशक में सक्कारा की खुदाई से निकली थीं। मूल वस्तुएँ अब उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन पुरातत्वविद वाल्टर बी. एमरी के कागजातों में रखी एक तस्वीर बच गई थी, जो इजिप्ट एक्सप्लोरेशन सोसाइटी के संग्रह में सुरक्षित थी।

तस्वीर से निकाली गई लिखावट

मैक्वेरी विश्वविद्यालय की डिजिटल तकनीशियन क्रिस्टल मिलर ने उस एक तस्वीर पर तीन चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई — पहले मुहर के हिस्से को बाकी पृष्ठभूमि से अलग किया, फिर रंगों को उलटकर उभार और गड्ढे के फर्क को साफ किया, और आखिर में उसे रेखाचित्र में बदला। शोध दल ने इसे सिक्के पर पेंसिल से लिया गया छाप जैसा बताया है, बस यह काम पूरी तरह डिजिटल था।

इस प्रक्रिया से मुहर पर बने सेरेख यानी शाही नाम-फलक पढ़े जा सके। इनमें दूसरा और तीसरा फलक मेरतनीथ के नाम से मेल खाता है और उसी शैली में बना है जिसमें पुरुष शासकों के नाम दर्ज किए जाते थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक यही वह बिंदु है, जो उन्हें रानी या संरक्षक नहीं, बल्कि राजा की श्रेणी में रखता है।

  • कितने समय तक शासन: अध्ययन का अनुमान है कि उन्होंने किसी न किसी रूप में करीब तीन दशक तक सत्ता में भूमिका निभाई।
  • दूसरा प्रमाण: उनका नाम शासक सेमरखेत की कब्र से मिली मुहर पर दर्ज शासकों की सूची में भी आता है।
  • पुरानी सामग्री, नया नतीजा: कोई नई खुदाई नहीं हुई, पूरा निष्कर्ष पुराने अभिलेखों को दोबारा पढ़ने से निकला।

अभिलेखागारों की नई अहमियत

शोध दल का कहना है कि दुनिया भर के संग्रहालयों और अभिलेखागारों में ऐसी हजारों तस्वीरें और नोटबुक पड़ी हैं, जिन्हें अब तक सहायक सामग्री माना जाता रहा। डिजिटल तकनीक के बाद वही सामग्री अपने आप में प्रमाण बन सकती है, भले ही मूल वस्तु कहीं खो चुकी हो।