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आर्कटिक में 1859 में मिले शव की पहचान, 166 साल पुरानी पहेली डीएनए से सुलझी

15 September 2026
आर्कटिक में 1859 में मिले शव की पहचान, 166 साल पुरानी पहेली डीएनए से सुलझी

ओटावा: आर्कटिक की बर्फ में डेढ़ सदी से दबी एक पहेली आखिरकार सुलझ गई है। कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय के मानवविज्ञानियों ने सर जॉन फ्रैंकलिन के 1845 के अभियान में शामिल चार और नाविकों की पहचान कर ली है। यह पहचान कंकाल अवशेषों से लिए गए डीएनए का मिलान आज जीवित वंशजों से करके की गई। इसके साथ ही डीएनए से पहचाने गए नाविकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।

फ्रैंकलिन का अभियान उत्तर-पश्चिमी समुद्री मार्ग की तलाश में निकला था। अप्रैल 1848 तक उनके दोनों जहाज एरेबस और टेरर करीब दो साल से बर्फ में फंसे हुए थे। उस समय बचे 105 लोगों ने जहाज छोड़कर नुनावुत के किंग विलियम द्वीप के पश्चिमी तट के रास्ते पैदल आगे बढ़ने का फैसला किया था।

1859 से अटकी थी एक पहचान

डॉ. डगलस स्टेंटन के अनुसार नई पहचान में से तीन नाविक एचएमएस एरेबस के थे और उनकी मृत्यु एरेबस खाड़ी में हुई थी। चौथा नाविक एचएमएस टेरर का अकेला ऐसा सदस्य है, जिसकी पहचान डीएनए से निश्चित रूप से हो सकी है। उसके अवशेष वहां से करीब 130 किलोमीटर दूर मिले थे।

यह नाविक हैरी पेगलर थे, जो जहाज पर फोरटॉप के कप्तान थे। उनकी पहचान वर्ष 1859 से ही अनिश्चित बनी हुई थी। उस साल मिले एक शव के पास पेगलर के दस्तावेज मौजूद थे, लेकिन कपड़े उनके पद से मेल नहीं खाते थे। इन दस्तावेजों को पेगलर पेपर्स कहा जाता है, जिनमें कविताएं और अभियान से जुड़े कुछ विवरण दर्ज हैं। इसी विरोधाभास के कारण डेढ़ सदी तक यह सवाल खुला रहा।

और किन-किन की हुई पहचान

  • विलियम ओरेन: एबल सीमैन, एचएमएस एरेबस।
  • डेविड यंग: बॉय फर्स्ट क्लास, एचएमएस एरेबस।
  • जॉन ब्रिजेंस: सबॉर्डिनेट ऑफिसर्स स्टीवर्ड, एचएमएस एरेबस।
  • हैरी पेगलर: कैप्टन ऑफ द फोरटॉप, एचएमएस टेरर।

इससे पहले वर्ष 2021 में जॉन ग्रेगरी और वर्ष 2024 में जेम्स फिट्जजेम्स की पहचान हो चुकी थी। डीएनए निकालने का काम लेकहेड विश्वविद्यालय के स्टीफन फ्रैटपिएत्रो ने किया। इसमें माइटोकॉन्ड्रियल और वाई गुणसूत्र की तुलना की गई, और चारों मामलों में आनुवंशिक दूरी शून्य पाई गई, यानी मिलान पूरी तरह सटीक था।

डॉ. रॉबर्ट पार्क का कहना है कि इन पहचानों का महत्व सिर्फ ऐतिहासिक नहीं है। इनसे उन परिवारों को जवाब मिलते हैं, जिनके पूर्वज पीढ़ियों पहले समुद्र में गुम हो गए थे। शोध के निष्कर्ष जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंस रिपोर्ट्स और पोलर रिकॉर्ड में प्रकाशित हुए हैं।