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जोधपुर झाल में लौटने लगे मेहमान परिंदे: 210 प्रजातियों का ठिकाना, पांच हजार से ज्यादा पक्षियों की आमद

21 September 2026
जोधपुर झाल में लौटने लगे मेहमान परिंदे: 210 प्रजातियों का ठिकाना, पांच हजार से ज्यादा पक्षियों की आमद

आगरा: कीठम के पास फैली जोधपुर झाल में मौसम बदलते ही मेहमान परिंदों की आमद शुरू हो गई है। यह आर्द्रभूमि 210 से ज्यादा पक्षी प्रजातियों का ठिकाना मानी जाती है और सर्दियों में यहां पांच हजार से अधिक पक्षी डेरा डालते हैं। इस बार शुरुआती जत्थे समय से पहले पहुंच गए हैं, जिससे पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं में उत्साह है।

झाल में सबसे पहले पहुंचने वाले पक्षियों में नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन टील और गारगेनी जैसी बत्तखें शामिल हैं। इनके साथ कॉमन रेडशैंक, स्पॉटेड रेडशैंक, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, केंटिश प्लोवर, कॉमन सैंडपाइपर, ग्रीनशैंक और वैगटेल भी दिखाई देने लगे हैं। ये पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे इलाकों से यहां पहुंचते हैं।

भोजन की उपलब्धता पर हो रहा सर्वे

वन विभाग ने झाल में पक्षियों के लिए उपलब्ध भोजन का आकलन करने के लिए महीने भर चलने वाला सर्वेक्षण शुरू कराया है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पानी में कितनी मात्रा में छोटी मछलियां, कीट-पतंगे, घोंघे और जलीय वनस्पतियां मौजूद हैं। भोजन की पर्याप्त उपलब्धता ही तय करती है कि प्रवासी पक्षी किसी जगह पर कितने समय तक रुकते हैं।

  • प्रजातियां: झाल में अब तक 210 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज
  • आमद: सर्दियों में पांच हजार से ज्यादा पक्षी यहां ठहरते हैं
  • सर्वे: भोजन की उपलब्धता जांचने के लिए महीने भर का अध्ययन

शोधकर्ताओं की निगरानी में इलाका

जैव विविधता शोध एवं विकास संस्था से जुड़े पर्यावरणविद डॉ. के पी सिंह लंबे समय से इस आर्द्रभूमि पर नजर रखे हुए हैं। उनके मुताबिक झाल का पारिस्थितिक तंत्र अपने आप में समृद्ध है और यहां आने वाले पक्षियों की संख्या हर साल दर्ज की जाती है। मथुरा स्थित मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नित्यानंद पांडेय भी इस अध्ययन से जुड़े हैं।

जानकारों का कहना है कि झाल जैसी आर्द्रभूमि केवल पक्षियों का ठिकाना नहीं, बल्कि भूजल स्तर बनाए रखने और आसपास के खेतों को नमी देने में भी मददगार होती है। यहां आने वाले पक्षी खेतों के कीटों को खाकर किसानों की भी अप्रत्यक्ष मदद करते हैं।

पक्षी प्रेमियों के लिए अगले कुछ हफ्ते सबसे अच्छा समय माने जा रहे हैं, क्योंकि अक्तूबर के बाद बड़ी संख्या में झुंड पहुंचने लगते हैं। वन विभाग ने आगंतुकों से शांति बनाए रखने और पक्षियों के करीब न जाने की अपील की है, ताकि उनका ठहराव बाधित न हो।