विश्व अल्जाइमर दिवस: 25 की उम्र में चीजें भूल रहे हैं, तो ये चार आदतें भी हो सकती हैं वजह

नई दिल्ली: क्या आपको कभी ऐसा लगता है कि मोबाइल कहां रखा था, किसी का नाम क्या था या अभी-अभी कही गई बात अचानक याद नहीं आ रही? छोटी-छोटी बातें भूलना आजकल युवाओं में भी आम होता जा रहा है। खासकर 20 से 25 साल की उम्र में ऐसी समस्या होने पर कई लोग इसे अल्जाइमर या किसी गंभीर दिमागी बीमारी से जोड़कर देखने लगते हैं।
समझने की जरूरत यह है कि हर बार भूलने की समस्या अल्जाइमर का संकेत नहीं होती। कम उम्र में याददाश्त कमजोर लगने के पीछे कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं, जो रोजमर्रा की आदतों से जुड़े होते हैं। विश्व अल्जाइमर दिवस के मौके पर इन्हीं कारणों को समझना उपयोगी रहेगा।
कम उम्र में भूलने की चार आम वजहें
- लगातार तनाव: काम, पढ़ाई, रिश्तों या आर्थिक चिंताओं से जुड़ा लगातार तनाव दिमाग की एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है। जब ध्यान किसी काम पर ठीक से नहीं लगता, तो उस जानकारी को याद रखना भी मुश्किल हो जाता है।
- नींद पूरी न होना: रात में देर तक जागना या लगातार कम नींद लेना याददाश्त और ध्यान दोनों पर असर डाल सकता है। अच्छी नींद दिमाग को दिनभर मिली जानकारी व्यवस्थित करने में मदद करती है।
- स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल: लगातार सोशल मीडिया, वीडियो और दूसरी डिजिटल गतिविधियों में व्यस्त रहने से ध्यान बार-बार भटकता है। इससे एकाग्रता कम महसूस होती है और छोटी-छोटी बातें याद रखने में परेशानी हो सकती है।
- खान-पान और सुस्त दिनचर्या: असंतुलित भोजन और नियमित व्यायाम की कमी भी समग्र स्वास्थ्य पर असर डालती है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
डॉक्टर से सलाह कब लेनी चाहिए
कभी-कभार किसी का नाम, सामान रखने की जगह या कोई छोटी बात भूल जाना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही हो, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, बार-बार एक ही बात पूछनी पड़े, परिचित जगहों या सामान्य कामों में परेशानी होने लगे, या याददाश्त में बदलाव के साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहता है।
जानकारों का कहना है कि नींद का समय तय करना, स्क्रीन से दूरी के छोटे अंतराल रखना और दिन में थोड़ी शारीरिक गतिविधि शामिल करना जैसी साधारण आदतें भी एकाग्रता पर सकारात्मक असर डाल सकती हैं। किसी भी बदलाव को लेकर परेशानी हो तो उसे टालने के बजाय समय रहते जांच कराना ज्यादा समझदारी भरा कदम माना जाता है।
यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण को लेकर अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।
