विश्व बांस दिवस: हर बांस वाला सामान पर्यावरण के लिए बेहतर नहीं, खरीदने से पहले जांचें ये बातें

नई दिल्ली: आजकल किसी उत्पाद पर बांस लिखा दिख जाए तो दिमाग में तुरंत यह बात आती है कि यह पर्यावरण के लिए बेहतर और टिकाऊ होगा। बांस के टूथब्रश, कप, कटलरी, स्टोरेज बॉक्स, फर्नीचर और यहां तक कि कपड़ों से जुड़े उत्पाद भी तेजी से जीवनशैली का हिस्सा बन रहे हैं। लेकिन क्या हर बांस वाला सामान वाकई पर्यावरण के लिए बेहतर होता है?
बांस तेजी से बढ़ने वाला पौधा है और कई परिस्थितियों में इसकी खेती सामग्रियों के नवीनीकरण का अच्छा विकल्प देती है। लेकिन किसी उत्पाद का पर्यावरणीय असर सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि वह बांस से बना है। उसकी मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग और इस्तेमाल के बाद उसे फेंकने के तरीके का भी उतना ही असर पड़ता है।
खरीदने से पहले ये पांच बातें देखें
- कितना बांस है: बांस उत्पाद लिखा होने का मतलब यह नहीं कि पूरा सामान बांस का ही है। कई उत्पादों में प्लास्टिक, रेसिन या दूसरे मटेरियल मिलाए जाते हैं, खासकर बांस फाइबर से बने कंपोजिट में। पैकेजिंग पर बनी तस्वीर देखकर फैसला न करें, मटेरियल कंपोजिशन जरूर पढ़ें।
- खेती भी मायने रखती है: बांस जल्दी तैयार हो जाता है और अलग-अलग जलवायु में उगाया जा सकता है, लेकिन टिकाऊपन सिर्फ बढ़ने की रफ्तार से तय नहीं होता। कहां उगाया गया, किस तरह खेती हुई और जमीन तथा पानी का इस्तेमाल कैसा रहा, ये सब अहम हैं।
- बनाने की प्रक्रिया: कच्चे बांस को तैयार उत्पाद बनाने में कटिंग, ड्राइंग, ट्रीटमेंट और प्रोसेसिंग की जरूरत पड़ती है। अगर इसमें बहुत ज्यादा प्रोसेसिंग, केमिकल या ऊर्जा लगती है तो पर्यावरणीय फुटप्रिंट भी बढ़ जाता है।
- कप और कटलरी में सावधानी: बांस का नाम देखकर किचनवेयर को अपने आप प्लास्टिक मुक्त या कंपोस्टेबल मान लेना सही नहीं है। कुछ कप, प्लेट या बर्तन में बाइंडर और दूसरे मटेरियल हो सकते हैं। खाने के संपर्क में आने वाले सामान की मटेरियल जानकारी और देखभाल के निर्देश जरूर पढ़ें।
- पैकेजिंग पर नजर: अगर सामान प्लास्टिक की कई परतों में आता है तो टिकाऊपन की पूरी कहानी बदल जाती है। कम, रिसाइकिल या दोबारा इस्तेमाल होने वाली पैकेजिंग का विकल्प बेहतर रहता है।
तो क्या बांस का सामान खरीदें
बांस को टिकाऊ मटेरियल मानने की ठोस वजहें जरूर हैं, लेकिन हर बांस लेबल वाले उत्पाद को पर्यावरण के अनुकूल मान लेना सही नहीं है। खरीदारी करते समय चार चीजों पर खास ध्यान देना चाहिए, मटेरियल, मैन्युफैक्चरिंग, टिकाऊपन और इस्तेमाल के बाद उसका क्या होगा। इसके साथ पैकेजिंग और सोर्सिंग की जानकारी भी देख लेना उपयोगी रहता है।
