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दो हजार साल पुराने जले हुए स्क्रॉल का राज खुला, स्याही में मिले सीसे ने दिखाया पढ़ने का रास्ता

17 September 2026
दो हजार साल पुराने जले हुए स्क्रॉल का राज खुला, स्याही में मिले सीसे ने दिखाया पढ़ने का रास्ता

बर्कले: करीब दो हजार साल पहले ज्वालामुखी की राख में दबकर कोयले में बदल चुके प्राचीन स्क्रॉल को पढ़ने की दिशा में नया रास्ता मिला है। एक नए अध्ययन के अनुसार इन स्क्रॉल की स्याही में मौजूद सीसा एक्स-रे की मदद से अक्षरों को अलग पहचानने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

यह अध्ययन 16 सितंबर 2026 को पत्रिका प्लॉस वन में प्रकाशित हुआ। इसे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले से जुड़े डगलस सीलर, अमेरिकी राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के जैकब माइकल लामान्ना और बर्कले के डेविड क्राइमर तथा उनके सहयोगियों ने किया है।

राख के नीचे दबा पुस्तकालय

ये स्क्रॉल इटली के नेपल्स के पास हरकुलेनियम के खंडहरों में मिले थे। 79 ईस्वी में वेसुवियस ज्वालामुखी के विस्फोट में यह शहर करीब 20 से 21 मीटर मोटी चट्टान और राख की परत के नीचे दब गया था। भीषण ताप ने स्क्रॉल को जलाकर कोयले जैसा बना दिया और वे इतने भंगुर हो गए कि उन्हें खोलने की कोशिश में टूट जाने का खतरा रहता है।

इनमें से कुछ स्क्रॉल जब खोले जा सके, तो उनमें यूनानी दार्शनिक एपिक्यूरस की अब तक अज्ञात रचनाएं सामने आईं। यही वजह है कि बाकी बंद स्क्रॉल में क्या लिखा है, इसे लेकर दुनियाभर के शोधकर्ताओं में गहरी दिलचस्पी है।

एक्स-रे के सामने क्या थी दिक्कत

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एक्स-रे टोमोग्राफी की मदद से कुछ स्क्रॉल को बिना खोले वर्चुअल तरीके से पढ़ा जा चुका है, लेकिन यह काम बेहद कठिन है। दिक्कत यह है कि स्याही और पपाइरस, दोनों का मुख्य घटक कार्बन है, इसलिए एक्स-रे में दोनों लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ स्क्रॉल के अक्षरों में सीसा मौजूद है, जिसे एक्स-रे आसानी से अलग पहचान लेती है। इस संभावना को परखने के लिए टीम ने अलग-अलग मात्रा में सीसा मिली स्याही से लिखकर स्क्रॉल तैयार किए और फिर उन्हें भट्ठी में गर्म कर उसी तरह कार्बनयुक्त बनाया, जैसा ज्वालामुखी की गर्मी ने किया था।

प्रयोग में क्या मिला

  • पहचान: एक्स-रे फ्लोरेसेंस ने हर सांद्रता पर स्याही में मौजूद सीसे को पकड़ लिया।
  • पढ़ाई: टोमोग्राफी और विशेष रूप से तैयार सॉफ्टवेयर की मदद से लिखे गए शब्द दोबारा पढ़े जा सके।
  • प्रशिक्षण: जिन स्क्रॉल का पाठ पहले से ज्ञात है, उन्हें दोबारा बनाकर वर्चुअल अनरोलिंग एल्गोरिदम को प्रशिक्षित और बेहतर भी किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं में शामिल सीलर के अनुसार यह आश्चर्यजनक है कि इलेक्ट्रॉनों से कितना कुछ कराया जा सकता है। अब तक जिन स्क्रॉल को हमेशा के लिए बंद मान लिया गया था, उन्हें पढ़ने की उम्मीद इस अध्ययन से और मजबूत हुई है।