रेगिस्तान के नीचे बहता पानी: तकलामाकान की रेत के भीतर मिले दो बड़े भूजल भंडार

उरुमकी: दुनिया के सबसे शुष्क इलाकों में गिने जाने वाले तकलामाकान रेगिस्तान की रेत के नीचे दो बड़े भूजल भंडार मिले हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पानी स्थिर नहीं है, बल्कि बह रहा है और इसमें प्राकृतिक रूप से दोबारा भरने के संकेत भी मिले हैं।
शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र के भूवैज्ञानिक ब्यूरो के जल-भूविज्ञान एवं पर्यावरण भूविज्ञान सर्वेक्षण केंद्र ने इस खोज की जानकारी दी है। पहला भंडार रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर मिनफेंग काउंटी के पास मिला है, जबकि दूसरा रेगिस्तान के भीतर मजारताग पहाड़ियों के दक्षिण में स्थित है।
कैसे मिला रेत के नीचे छिपा पानी
वैज्ञानिकों ने इस खोज तक पहुंचने के लिए कई तरीकों को एक साथ इस्तेमाल किया। पहले सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग से इलाके का अध्ययन किया गया, फिर हवाई भूभौतिकीय सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद जमीन पर अन्वेषण और ड्रिलिंग की गई और अंत में त्रि-आयामी जल-भूवैज्ञानिक मॉडल तैयार किए गए।
इन मॉडलों से पता चला कि भूमिगत जल दोनों ही रूपों में मौजूद है, मीठा भी और खारा भी। परियोजना प्रमुख कांग जियान के अनुसार पानी का बहाव और प्राकृतिक पुनर्भरण के संकेत इस खोज को और अहम बनाते हैं, क्योंकि इसका अर्थ है कि यह भंडार एक बार इस्तेमाल होकर खत्म हो जाने वाला संसाधन नहीं है।
खेती और पर्यावरण दोनों के लिए संभावनाएं
सर्वेक्षण केंद्र के निदेशक झांग लेई के अनुसार एक प्रायोगिक केंद्र पर यह परखा जा रहा है कि कम खारेपन वाले भूजल का सिंचाई में सुरक्षित उपयोग किस तरह किया जा सकता है। इससे रेगिस्तान के किनारे बसे इलाकों में खेती की संभावनाएं बन सकती हैं।
इस खोज को रेगिस्तान के फैलाव को रोकने और पारिस्थितिकी बहाली के प्रयासों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रेगिस्तान के किनारों पर हरियाली बढ़ाने के लिए पानी सबसे बड़ी जरूरत होती है।
कितना बड़ा है तकलामाकान
- क्षेत्रफल: तकलामाकान रेगिस्तान करीब 3,37,600 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
- परिधि: इसकी परिधि लगभग 3,046 किलोमीटर है।
- स्थान: यह चीन का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खिसकती रेत वाला रेगिस्तान है।
रेत के इस विशाल समुद्र के नीचे पानी की मौजूदगी लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल का विषय रही है। नए सर्वेक्षण ने इस पहेली का एक हिस्सा सुलझाया है, हालांकि इसके भंडार की सटीक सीमा और दीर्घकालिक उपयोग की क्षमता समझने के लिए अध्ययन जारी रहेगा।
