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विश्व पर्यटन दिवस से पहले बना लें योजना: सितंबर के आखिर में घूमने के लिए ये पांच ठिकाने सबसे बेहतर

21 September 2026
विश्व पर्यटन दिवस से पहले बना लें योजना: सितंबर के आखिर में घूमने के लिए ये पांच ठिकाने सबसे बेहतर

यात्रा डेस्क: हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। सितंबर का आखिरी हफ्ता घूमने के लिहाज से बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि इस समय बारिश थम चुकी होती है, पहाड़ और जंगल हरे-भरे रहते हैं और भीड़ भी अपेक्षाकृत कम होती है। अगर इस मौके पर कहीं निकलने की योजना बना रहे हैं तो देश में ही पांच ऐसी जगहें हैं जो इस मौसम में सबसे सुंदर दिखती हैं।

पांच चुनिंदा ठिकाने

  • केरल: मुन्नार के चाय बागान और पहाड़ियां, अलपुझा की नहरों में हाउसबोट और वायनाड के झरने तथा जंगल
  • सिक्किम: गंगटोक के बाजार और नजारे, पेलिंग से हिमालय के दृश्य, झीलें और बौद्ध मठ
  • राजस्थान: जयपुर का आमेर किला और सिटी पैलेस, उदयपुर की झीलें और महल, जोधपुर की गलियां
  • मेघालय: शिलांग और उमियम झील, चेरापूंजी के झरने और डावकी में उमंगोत नदी का साफ पानी
  • लद्दाख: लेह, पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी, मैग्नेटिक हिल और पुराने मठ

केरल इस मौसम में सबसे हरा-भरा रहता है। मुन्नार की ढलानों पर फैले चाय बागान सुबह की धुंध में अलग ही दिखते हैं, जबकि अलपुझा में हाउसबोट पर एक रात बिताना अपने आप में अनुभव है। वायनाड के जंगल और झरने उन लोगों के लिए बेहतर हैं जो भीड़ से दूर रहना चाहते हैं।

पूर्वोत्तर की बात करें तो सिक्किम और मेघालय दोनों ही इस समय खिले रहते हैं। पेलिंग से साफ मौसम में हिमालय की चोटियां दिखती हैं और मठों का शांत वातावरण यात्रा को सुकून भरा बना देता है। मेघालय में चेरापूंजी के आसपास बारिश के बाद झरने पूरे वेग में होते हैं।

जाने से पहले ये ध्यान रखें

पहाड़ी इलाकों में जाने से पहले मौसम की जानकारी ले लेना जरूरी है, क्योंकि सितंबर के आखिर तक कहीं-कहीं बारिश बनी रहती है। लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचने के बाद पहला दिन आराम करने में लगाना चाहिए, ताकि शरीर वहां की हवा के अनुकूल हो सके।

इसके अलावा ठहरने की बुकिंग पहले से कराना, जरूरी दवाएं साथ रखना और स्थानीय नियमों का पालन करना यात्रा को आसान बनाता है। कई इलाकों में भीतरी क्षेत्रों में जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है, जिसकी जानकारी पहले से जुटा लेनी चाहिए।

जिम्मेदार पर्यटन का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। कचरा साथ लेकर लौटना, स्थानीय कारीगरों से सामान खरीदना और होमस्टे में ठहरना उस इलाके के लोगों की आमदनी बढ़ाता है और यात्रा को ज्यादा यादगार भी बना देता है।