साइप्रस के प्राचीन मंदिर की दीवार पर मिलीं 23 जहाजों की आकृतियां, 300 साल तक चलती रही नक्काशी

निकोसिया: साइप्रस के एक प्राचीन मंदिर की दीवार पर उकेरी गई जहाजों की आकृतियों को लेकर करीब चालीस साल पुरानी धारणा बदल गई है। अब तक माना जाता था कि ये सभी आकृतियां कांस्य युग के अंत में एक ही समय पर बनाई गई थीं। नई जांच बताती है कि इन्हें बनाने का सिलसिला करीब 300 साल तक चला और एक के बाद एक पीढ़ी इसमें जुड़ती रही।
वर्ष 2024 में एक दल ने कीशन कथारी स्थित इस प्राचीन मंदिर की दीवारों पर उच्च क्षमता वाले लेजर स्कैनर लगाए। स्कैन में 23 संभावित जहाज उभरकर सामने आए, जिनमें से कई नंगी आंखों से लगभग अदृश्य थे। खास बात यह रही कि दल इन जहाजों की तलाश में था ही नहीं।
खोज संयोग से मिली
ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय की कैरोलिन बार्न्स ने बताया कि जब हमने इतने सारे जहाज देखे, तो मुझे बेहद रोमांच हुआ। उन्होंने कहा कि परियोजना में जाते समय हमारा इरादा इन पत्थरों को लेजर से स्कैन करना था, ताकि द्वीप पर कांस्य युग के उत्तरार्ध की चिनाई और तराशे गए पत्थरों पर चल रहे हमारे बड़े अध्ययन में इजाफा हो सके। यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ नॉटिकल आर्कियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
ये आकृतियां मंदिर संख्या एक की दक्षिणी दीवार पर बनी हैं, जिसके सामने कभी एक सुरक्षित खाड़ी हुआ करती थी। माना जाता है कि प्राचीन बंदरगाह वहीं रहा होगा, हालांकि उसका सटीक स्थान आज भी अज्ञात है। वर्ष 1982 में यहां उन्नीस जहाज दर्ज किए गए थे और दो अन्य आकृतियां मंदिर संख्या चार की एक वेदी पर मिली थीं।
मरम्मत के पत्थर ने खोला राज
सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के ग्राहम ब्राउन और उनके दल ने पत्थरों का त्रिआयामी पुनर्निर्माण किया। इसी दौरान एक अप्रत्याशित बात सामने आई। दीवार में मरम्मत के लिए लगाया गया एक छोटा पत्थर, जो बाकी दीवार से करीब 150 साल बाद जोड़ा गया था, उस पर भी एक जहाज उकेरा मिला। यही सबूत बताता है कि जहाज सैकड़ों साल तक जोड़े जाते रहे।
- छह श्रेणियां: शोधकर्ताओं ने जहाजों को छह वर्गों में बांटा, जिनमें लेवांत के व्यापारिक जहाज, मिनोअन पालनौकाएं, कार्मेल तट की संभावित मिश्रित गैली और एक विशिष्ट साइप्रसी मिश्रित नाव शामिल हैं।
- ऊंचाई का फर्क: मंदिर एक की आकृतियां आंखों की सीध में बनी हैं, जबकि मंदिर चार की वेदी पर बनी आकृतियां फर्श के पास उकेरी गईं।
- आगे की योजना: दल अब मंदिर की दीवारों का आभासी पुनर्निर्माण करना चाहता है, ताकि लोग इन आकृतियों को उनके असली माहौल में देख सकें।
शोधकर्ताओं का कहना है कि पतन शब्द से अक्सर यह भाव निकलता है कि सब कुछ मिट गया और बहुत बाद में नए सिरे से शुरुआत हुई। लेकिन साइप्रस में जब दूसरी जगह शहर खाली हो रहे थे, तब भी लोग जहाज उकेरते रहे। उनके मुताबिक इससे अंदाजा लगता है कि जहाज और समुद्री यात्रा उस समाज की रोजमर्रा की जिंदगी का आम हिस्सा थे। साइप्रस में जहाज उकेरने की परंपरा मध्यकाल तक दर्ज मिलती है।
वेदी के पास फर्श के करीब बनी आकृतियों को लेकर शोधकर्ताओं का मानना है कि वेदी की लौ की टिमटिमाती रोशनी में ये जहाज हिलते हुए प्रतीत होते होंगे, मानो कोई नाव लहराती रोशनी पर तैर रही हो।
