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चांद पर मिला दो साल पुराना विशाल गड्ढा, 222 मीटर चौड़े इस निशान ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

18 September 2026
चांद पर मिला दो साल पुराना विशाल गड्ढा, 222 मीटर चौड़े इस निशान ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

वाशिंगटन: वैज्ञानिकों ने चांद पर एक विशाल नया गड्ढा खोजा है, जो रोमन कोलोसियम से भी बड़ा है। यह करीब दो साल पहले एक जबरदस्त टक्कर से बना था, लेकिन उस समय इसका पता ही नहीं चल सका। इसे सौरमंडल में हाल के दौर का सबसे बड़ा ज्ञात प्रभाव गड्ढा बताया जा रहा है।

यह खुलासा बुधवार को प्रकाशित दो अलग-अलग अध्ययनों में हुआ, जो साइंस अडवांसेज में छपे हैं। शोध के मुताबिक इतनी बड़ी टक्कर औसतन हर 132 साल में सिर्फ एक बार होती है। अध्ययन में कहा गया है कि यह घटना सांख्यिकीय रूप से बेहद दुर्लभ है और प्रभावी तौर पर जीवन में एक बार मिलने वाला अवलोकन है।

दो साल तक आंकड़ों में छिपा रहा

यह गड्ढा लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर ने मई 2024 में चांद के उस हिस्से पर देखा था, जो धरती की ओर रहता है। यह किसी क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के टुकड़े से बना। गड्ढा करीब 728 फीट यानी 222 मीटर चौड़ा और 141 फीट यानी करीब 43 मीटर तक गहरा है। यह पिछले रिकॉर्ड गड्ढे से तीन गुना बड़ा है, जिसे इसी यान ने करीब एक दशक पहले खोजा था।

दिलचस्प बात यह रही कि यान ने मई 2024 में तस्वीरें ले तो लीं, पर जानकारी विशाल आंकड़ों में दबी रह गई। अगस्त 2025 में वैज्ञानिकों ने उन्हीं तस्वीरों में इस नए गड्ढे की पहचान की। इसके बाद पिछली सर्दियों में और विस्तृत तस्वीरें ली गईं और इस साल की शुरुआत में खोज की पुष्टि हुई। धरती और अंतरिक्ष की दूरबीनें उस समय इस घटना को पकड़ नहीं पाई थीं।

100 किलोमीटर तक फैला असर

  • नाम: गड्ढे का नाम दिवंगत वैज्ञानिक थॉमस मैकगेटचिन के नाम पर रखा गया है, जो ह्यूस्टन के लूनर एंड प्लैनेटरी इंस्टीट्यूट के निदेशक रहे थे।
  • फैलाव: टक्कर का असर चांद की सतह पर 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक पड़ा, धूल और पथरीली मिट्टी उम्मीद से कहीं ऊंचे कोण पर और दूर तक फेंकी गई।
  • ठंडा इलाका: दूसरे अध्ययन में गड्ढे के आसपास करीब सात किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र मिला, जो बताता है कि ऊपरी चंद्र मिट्टी ढीली होकर उलट-पुलट गई।

इस यान के कैमरों के प्रमुख वैज्ञानिक मार्क रॉबिन्सन इस अध्ययन के मुख्य लेखक हैं। सह-लेखक और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय लॉस एंजिलिस के डेविड पेज ने इसकी तुलना बागवानी से की और कहा कि टक्करें चांद की ऊपरी मिट्टी को बाग की मिट्टी की तरह पलटने का काम करती हैं।

शोध के मुताबिक उल्कापिंडों से उछली सामग्री हर 80 हजार साल में चांद की करीब एक इंच यानी दो सेंटीमीटर ऊपरी मिट्टी को पलट देती है, जो पहले के अनुमान से तेज है। इसका एक नतीजा यह भी है कि अपोलो यात्रियों के पदचिह्न हमेशा नहीं टिकेंगे। अब अगला कदम यह आकलन करना है कि प्रस्तावित चंद्र ठिकाने पर ऐसे मलबे के गिरने का जोखिम कितना है, ताकि इंजीनियर ज्यादा सुरक्षित ढांचे बना सकें।