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दून मेडिकल कॉलेज की नई पहल: रैगिंग रोकने को नए एमबीबीएस छात्र सीनियर्स से अलग हॉस्टल में रहेंगे

14 September 2026
दून मेडिकल कॉलेज की नई पहल: रैगिंग रोकने को नए एमबीबीएस छात्र सीनियर्स से अलग हॉस्टल में रहेंगे

देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज ने नए एमबीबीएस छात्रों को रैगिंग से बचाने के लिए इस बार सत्र की शुरुआत से ही अलग व्यवस्था कर दी है। प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले छात्रों को सीनियर छात्रों के हॉस्टल के बजाय अलग इंटर्न हॉस्टल में ठहराया जाएगा।

कॉलेज प्रशासन ने यह कदम परिसर में रैगिंग की आशंका को शुरुआत में ही खत्म करने के इरादे से उठाया है। अलग हॉस्टल में रखने का मकसद नए छात्रों का सीनियर्स से शुरुआती संपर्क सीमित करना है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति बनने से पहले ही रोक दी जाए।

प्राचार्य ने तय की व्यवस्था

प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने नए छात्रों के आवास को लेकर व्यवस्था तय कर दी है। इसके साथ ही एंटी रैगिंग सेल और हॉस्टल वार्डन को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज प्रशासन नए छात्रों की गतिविधियों और हॉस्टल व्यवस्था पर लगातार नजर रखेगा।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

दून मेडिकल कॉलेज में इससे पहले रैगिंग से जुड़े दो मामले सामने आ चुके हैं। यही वजह है कि नए बैच के छात्रों के कॉलेज पहुंचते ही प्रशासन ने एहतियाती इंतजाम शुरू कर दिए। बीते मामलों से सबक लेकर व्यवस्था पहले से बदल देना, कार्रवाई के इंतजार में बैठे रहने से बेहतर माना जा रहा है।

  • अलग आवास: प्रथम वर्ष के छात्र इंटर्न हॉस्टल में रहेंगे, जहां सीनियर छात्रों की आवाजाही नहीं होगी।
  • निगरानी तंत्र: एंटी रैगिंग सेल और हॉस्टल वार्डन को सतर्कता बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सा शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में पहला साल छात्रों के लिए सबसे संवेदनशील होता है। घर से पहली बार दूर आया छात्र नए माहौल, कठिन पाठ्यक्रम और लंबी कक्षाओं के बीच खुद को संभाल रहा होता है। ऐसे समय में सुरक्षित और तनावमुक्त आवासीय माहौल मिलना पढ़ाई पर सीधा असर डालता है।