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मिस्र की भूली हुई रानी: 1940 के एक धुंधले चित्र ने खोला रहस्य, मेरेटनीथ को मिली शासक की पहचान

21 September 2026
मिस्र की भूली हुई रानी: 1940 के एक धुंधले चित्र ने खोला रहस्य, मेरेटनीथ को मिली शासक की पहचान

सिडनी: प्राचीन मिस्र के पहले राजवंश की एक शाही स्त्री मेरेटनीथ को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब एक नए शोध से सुलझता दिख रहा है। ऑस्ट्रेलिया के एक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अस्सी साल पुराने एक धुंधले चित्र को डिजिटल तकनीक से पढ़कर यह निष्कर्ष निकाला है कि उन्हें केवल रानी नहीं, बल्कि शासक के रूप में दर्ज किया गया था।

मेरेटनीथ को पहले राजवंश के तीसरे राजा जेर की पुत्री माना जाता है। उनके नाम का उल्लेख कई जगह मिलता है, लेकिन शासक की औपचारिक पहचान से जुड़ा प्रमाण विवादित रहा। यह प्रमाण मिट्टी की एक मुहरनुमा डाट पर खुदी चित्रलिपि में छिपा है, जिसकी 1940 के दशक में खींची गई एक ही तस्वीर आज बची है।

खो चुकी वस्तु, बची हुई तस्वीर

सक्कारा के एक मकबरे से तेरह ऐसी डाट निकाली गई थीं। खुदाई करने वाले पुरातत्वविद वाल्टर बी एमरी के दस्तावेजों में इनकी एक तस्वीर लंदन के एक शोध संस्थान के अभिलेखागार में सुरक्षित रह गई, जबकि मूल वस्तु और कांच की मूल प्लेट दोनों खो गईं। तस्वीर में एक पंक्ति में चार सेरेख दिखते हैं, जो शासक का नाम घेरने वाला आयताकार चिह्न होता है।

एमरी का कहना था कि पहला और चौथा सेरेख राजा जेर का है, जबकि दूसरे और तीसरे में मेरेटनीथ का नाम है। उनके समकालीन विद्वानों ने इस दावे को यह कहकर खारिज कर दिया था कि तस्वीर इतनी स्पष्ट नहीं है कि उससे कुछ पढ़ा जा सके। यह बहस वहीं थम गई थी।

  • शोध: एक यूरोपीय शोध पत्रिका के 2026 अंक में प्रकाशित
  • तकनीक: चिह्नों को अलग कर रंग उलटना और उन्हें वेक्टर चित्र में बदलना
  • निष्कर्ष: दूसरे और तीसरे सेरेख के चिह्न मेरेटनीथ के नाम से मेल खाते हैं

सिक्के की छाप जैसी तकनीक

शोध दल ने तस्वीर को नए सिरे से पढ़ने के लिए एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने चित्र से केवल चित्रलिपि के चिह्नों को अलग किया, उनके रंग उलटे और फिर उन्हें ऐसे डिजिटल चित्र में बदला जिसे बिना धुंधला हुए कितना भी बड़ा किया जा सके। शोधकर्ताओं ने इसे सिक्के पर कागज रखकर पेंसिल से ली गई छाप जैसा बताया, बस यह काम तकनीक से हुआ।

इस प्रक्रिया के बाद जो चिह्न उभरे, वे मेरेटनीथ के नाम के अनुरूप पाए गए। इसका अर्थ यह निकला कि उन्हें सेरेख में दर्ज किया गया था, जो अब तक शासकों के लिए ही प्रयुक्त होता माना जाता था। इसके साथ ही वह ऐसी दूसरी महिला बन जाती हैं जिनका नाम शाही सेरेख में दर्ज मिला है।

मेरेटनीथ के पक्ष में और भी संकेत पहले से मौजूद थे। शाही कब्रिस्तान में उनका भव्य अंत्येष्टि परिसर बना, उनके नाम के साथ प्रशासनिक पदवियां जुड़ीं, मकबरों की मुहरों पर उनका उल्लेख मिला और एक बाद के शासक की मुहर पर भी उनका नाम दर्ज है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि उन्होंने किसी न किसी रूप में कम से कम तीस वर्ष तक सत्ता में भूमिका निभाई।

शोध में उनके जीवन के तीन चरण सुझाए गए हैं। पहले चरण में वह राजा जेर के साथ सह-शासक के रूप में दिखती हैं, बाद में मुहरों पर वह संरक्षक और राजमाता के रूप में सामने आती हैं। इस पूरी अवधि में कोष और अधिकारियों पर उनका नियंत्रण रहा, भले ही किसी औपचारिक राजनीतिक पदवी का उल्लेख न मिलता हो।