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आठ सौ साल पुराना किला जो कभी गायब हुआ ही नहीं था, प्लास्टर के नीचे मिलीं मध्यकालीन दीवारें

19 September 2026
आठ सौ साल पुराना किला जो कभी गायब हुआ ही नहीं था, प्लास्टर के नीचे मिलीं मध्यकालीन दीवारें

डबलिन: आयरलैंड की राजधानी डबलिन के जिन मध्यकालीन किलों को सदियों से ढहा हुआ मान लिया गया था, उनमें से एक असल में सबकी आंखों के सामने खड़ा था। शोधकर्ताओं ने पाया है कि यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन के परिसर में मौजूद रूबक कैसल नाम की इमारत के भीतर वह पुराना किला आज भी सुरक्षित है। बाहर से देखने पर यह इमारत पूरी तरह विक्टोरियन काल की लगती है, लेकिन उसकी दीवारों के भीतर तेरहवीं सदी की चिनाई छिपी हुई है।

इस खोज को मध्यकालीन स्थापत्य इतिहास के विशेषज्ञ प्रो. टाड ओकीफ ने अंजाम दिया, जो विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग से जुड़े हैं। उन्होंने मौजूदा इमारत के प्लास्टर के नीचे बची हुई दीवारों और मध्यकालीन स्थापत्य की विशेषताओं की पहचान की। यह अध्ययन पुरातत्व पत्रिका आर्कियोलॉजी आयरलैंड में प्रकाशित हुआ है।

किसी भी आयरिश परिसर की सबसे पुरानी इमारत

शोध के मुताबिक इमारत के सबसे पुराने हिस्से तेरहवीं सदी के शुरुआती दौर के हैं। इस लिहाज से यह आयरलैंड के किसी भी विश्वविद्यालय परिसर में खड़ी सबसे पुरानी इमारत हो सकती है। भीतर जाने पर पुराने किले की दीवारें साफ महसूस होती हैं, हालांकि मध्यकालीन बनावट प्लास्टर के नीचे छिपी हुई है।

तोड़ा नहीं, उसी के चारों ओर बना दिया

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जॉर्जियन और विक्टोरियन दौर में जब इमारत का आधुनिकीकरण किया गया, तब मध्यकालीन किले को गिराया नहीं गया। नई इमारत उसी के चारों ओर खड़ी कर दी गई और परिसर में इसके अलावा बहुत कम निर्माण हुआ। आज इमारत के पिछले हिस्से में जो आंगन दिखाई देता है, वह असल में उसी मध्यकालीन किले का आंगन है।

किले से जुड़ी कहानियां

  • निर्माण का समय: ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि यह किला 1169 के नॉर्मन आक्रमण की स्मृति ताजा रहते ही बना था और मध्ययुग में इसमें कई बार बदलाव हुए।
  • प्रमुख निवासी: यहां रहने वालों में आयरलैंड के एक मध्यकालीन लॉर्ड हाई चांसलर भी रहे।
  • परंपरा की कथा: मान्यता है कि सिंहासन गंवाने के बाद 1689 में अपदस्थ राजा जेम्स द्वितीय ने भी यहां प्रवास किया था।

एक चित्रकार की वजह से बची कड़ी

अठारहवीं सदी तक यह किला खंडहर में बदल चुका था और बाद में इसे पूरी तरह हटा दिया गया माना जाने लगा। लेकिन करीब 1765 में चित्रकार गैब्रिएल बेरांजर इन खंडहरों तक पहुंचे और उन्होंने जलरंग चित्रों में उन्हें दर्ज कर लिया। उनके चित्रों में इतनी बारीकियां थीं कि आज इमारत के ढांचे का इतिहास समझने में वे निर्णायक साबित हुए।

दक्षिणी डबलिन में मध्यकालीन किले बहुत कम बचे हैं। सत्रहवीं सदी में इनमें से कई गिरा दिए गए और उनके पत्थरों का इस्तेमाल अधिक आरामदेह आवासों के निर्माण में किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि हर खोई हुई इमारत असल में एक खोया हुआ ऐतिहासिक दस्तावेज होती है, इसलिए ऐसी पहचान का महत्व और बढ़ जाता है।