भारत-बांग्लादेश व्यापार को मिलेगी रफ्तार: संयुक्त कार्यबल बनाने की तैयारी, रोजाना पांच हजार वीजा जारी

ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच कारोबार को नई रफ्तार देने के लिए संयुक्त कार्यबल बनाने पर विचार चल रहा है। ढाका में भारत के उप उच्चायुक्त पवनकुमार तुलसीदास बढ़े ने रविवार को बांग्लादेश के प्रमुख उद्योग संगठन के प्रशासक एम फजलुल हक से मुलाकात कर इस पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने कारोबारियों की आवाजाही आसान बनाने पर जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि इस समय बांग्लादेश में भारतीय मिशन की ओर से रोजाना करीब पांच हजार वीजा जारी किए जा रहे हैं। इनमें कारोबार, इलाज और पढ़ाई के लिए यात्रा करने वाले लोग शामिल हैं। कारोबारी संगठनों की मांग है कि व्यापारिक यात्राओं के लिए प्रक्रिया और सरल बनाई जाए।
दो दिन पहले बनी थी सहमति
इस मुलाकात से दो दिन पहले ढाका में बांग्लादेश के उद्योग संगठन और भारतीय उद्योग परिसंघ के बीच कारोबारियों का साझा कार्यबल बनाने पर सहमति बनी थी। भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि दोनों देशों के उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं और साझा मंच से कई अड़चनें दूर की जा सकती हैं।
- वीजा: रोजाना करीब पांच हजार वीजा जारी किए जा रहे हैं
- कार्यबल: दोनों देशों के उद्योग संगठनों के बीच साझा मंच पर सहमति
- एजेंडा: गैर-शुल्क अड़चनें, मानकों की मान्यता और आवाजाही की सुविधा
गैर-शुल्क अड़चनें हटाने पर जोर
कारोबारियों का कहना है कि शुल्क से ज्यादा परेशानी गैर-शुल्क अड़चनों से होती है। इनमें जांच में लगने वाला समय, प्रमाणपत्रों की अलग-अलग शर्तें और सीमा चौकियों पर ढांचागत सुविधाओं की कमी शामिल है। संयुक्त कार्यबल का एक बड़ा काम इन्हीं बाधाओं की पहचान कर समाधान सुझाना होगा।
बीते वर्षों में कुछ स्थलीय बंदरगाहों से माल की आवाजाही पर लगी शर्तों के कारण कारोबार प्रभावित हुआ था। दोनों पक्ष अब इन रास्तों को फिर से सुचारू बनाने और नए मार्ग खोलने की संभावनाओं पर बात कर रहे हैं।
भारत और बांग्लादेश के बीच कपड़ा, खाद्य वस्तुएं, वाहन कलपुर्जे, दवाइयां और रसायन का बड़ा कारोबार होता है। दोनों देशों की सीमा साझा होने के कारण सड़क और रेल मार्ग से माल भेजना अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है, जिससे छोटे और मझोले उद्यमियों को भी मौका मिलता है।
