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यूरोपीय संघ का पहला सहयोगी सदस्य बन सकता है कनाडा: फ्रांस ने किया समर्थन, अंतरिक्ष से ऊर्जा तक साझेदारी की तैयारी

21 September 2026
यूरोपीय संघ का पहला सहयोगी सदस्य बन सकता है कनाडा: फ्रांस ने किया समर्थन, अंतरिक्ष से ऊर्जा तक साझेदारी की तैयारी

सेंट पियरे: कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला सहयोगी सदस्य बनाने के प्रस्ताव को फ्रांस का समर्थन मिल गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात के बाद इस पहल का समर्थन किया। दोनों नेताओं की यह बैठक उत्तरी अटलांटिक में स्थित सेंट पियरे और मिकलोन में हुई।

करीब 5,800 लोगों की आबादी वाला यह छोटा द्वीपसमूह फ्रांस का हिस्सा है और कनाडा के तट के बेहद करीब पड़ता है। यही वजह है कि इसे दोनों देशों की नजदीकी का प्रतीक मानकर बैठक के लिए चुना गया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की ओर से सहयोगी सदस्यता का प्रस्ताव पहले ही सामने रखा जा चुका है।

किन क्षेत्रों में होगी साझेदारी

प्रस्तावित साझेदारी का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है। इसमें अंतरिक्ष, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्रक्षेपण प्रणालियों और जमीनी स्वागत केंद्रों के साझा उपयोग पर बात हो रही है, जबकि ऊर्जा के क्षेत्र में तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अहम विषय है।

  • अंतरिक्ष: प्रक्षेपण प्रणाली, उपग्रह और जमीनी केंद्रों में सहयोग
  • ऊर्जा: तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर चर्चा
  • तकनीक: क्वांटम कंप्यूटिंग और महाशक्तिशाली संगणकों पर साझा काम

खनिजों पर भी नजर

बातचीत में महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति भी प्रमुख विषय रही। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी तकनीक के लिए जरूरी होते हैं। कनाडा के पास इनका बड़ा भंडार है, जबकि यूरोप इनकी आपूर्ति के लिए नए साझेदार तलाश रहा है।

सहयोगी सदस्यता की अवधारणा नई है। इसके तहत कोई देश पूर्ण सदस्य बने बिना यूरोपीय संघ के कई कार्यक्रमों और बाजारों से जुड़ सकता है। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच पहले से एक व्यापक व्यापार समझौता लागू है, जिस पर यह नई व्यवस्था आगे बढ़ सकती है।

जानकारों का मानना है कि इस साझेदारी से दोनों पक्षों को आपूर्ति शृंखला मजबूत करने और तकनीकी क्षमताएं साझा करने का मौका मिलेगा। प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना अगला कदम होगा।